Big Breaking : बिहार में फिर से होगा एक सीट पर उपचुनाव !

बिहार की राजनीति के दिग्गज नेता रमई राम को उन्हीं के गढ़ बोचहां में परास्त कर सुर्खियों में आए विधायक मुसाफिर पासवान की आज लंबी बीमारी के बाद मृत्यु हो गई है. मुसाफिर पासवान के निधन के बाद बिहार के सभी राजनीतिक दलों के प्रमुखों ने अपनी शोक संवेदना व्यक्त की है.

वैसे तो मुसाफिर पासवान सिर्फ एक विधायक थें लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि कद्दावर दलित नेता रमई राम जिनकी बोचहां के इलाके में तूती बोलती थी, उन्हें मुसाफिर पासवान ने उसी बोचहां में मात दी थी जिसे कभी रमई राम का बोचहां कहा जाता था.

बोचहां से लगातार 08 बार जीत का रिकॉर्ड बनाने वाले रमई राम की लालू राबड़ी शासन के दौरान प्रभावशाली मंत्री माने जाते थें. वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान बिहार में जेडीयू को 20 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल हो गई थी. इसे देखते हुए रमई राम ने पाला बदल लिया और आरजेडी से जेडीयू में शामिल हो गए.

दलबदल कानून के तहत रमई राम की सदस्यता चली गई और बोचहां में उपचुनाव हुए. रमई राम जेडीयू के उम्मीदवार बनें तो आरजेडी ने मुसाफिर पासवान को मैदान में उतार दिया. लोगों ने रमई राम के पाला बदलने को लेकर काफी गुस्सा था. मुसाफिर पासवान ने रमई राम को बड़े अंतर से परास्त कर दिया. रमई राम का गढ़ टूट चुका था.

वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में रमई राम को एक निर्दलीय उम्मीदवार बेबी कुमारी से भी हारना पड़ा. इस चुनाव में महागठबंधन समर्थित जेडीयू उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे रमई राम को 24 हजार वोटों के अंतर से हार का मुंह देखना पड़ा. रमई राम के चक्कर में इस चुनाव में मुसाफिर पासवान टिकट से वचिंत रह गए थें.

2020 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से रमई राम और मुसाफिर पासवान के बीच टक्कर हुई. रमई राम एक बार फिर से पाला बदलकर आरजेडी के साथ चले गए. टिकट भी मिल गया. उधर एनडीए में खेला हो गया. निर्दलीय विधायक बेबी कुमारी बीजेपी में शामिल तो हो गई लेकिन बोचहां सीट मुकेश सहनी की पार्टी विकासशील इंसान पार्टी के खाते में चली गई. मुसाफिर पासवान वीआईपी के उम्मीदवार बनें तो लगभग 11 हजार वोटों के अंतर से एक बार फिर रमई राम को धूल चटा दी.

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