रंजीत रंजन को राज्यसभा में भेजकर कांग्रेस ने बिहारियों पर बड़ा उपकार किया है, जानिए कैसे ?

कांग्रेस ने जन अधिकार पार्टी लोकतांत्रिक के मुखिया राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन को छत्तीसगढ़ से राज्यसभा भेजा है। कई लोगों का मानना है कि बिहार की राजनीति में सियासी छांव तलाश रहे पप्पू यादव को कांग्रेस के इस कदम से बड़ी राहत और बड़ा सहारा मिला है लेकिन कम ही लोग इस बात से वाकिफ होंगे कि पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन को राज्यसभा भेजकर कांग्रेस ने बिहारियों पर बड़ा उपकार किया है. वह कैसे, हम आपको बता देते हैं।

दरअसल जिस वक्त पप्पू यादव सांसद हुआ करते थें, उस वक्त राजधानी दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास में सेवाश्रम चला करता था। इस सेवाश्रम में पूरे बिहार से गरीब मरीज इलाज के लिए जो दिल्ली जाया करते थें, उनके रहने और भोजन का इंतजाम पप्पू यादव और उनकी पत्नी रंजीत रंजन के सरकारी आवास में हुआ करता था।

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उस सेवाश्रम की यह खासियत थी कि न तो उसमें किसी की जाति पूछी जाती थी, न धर्म और न क्षेत्र। जो भी जाता सबके लिए पप्पू और रंजीत के सेवाश्रम में जगह मिलता। सुबह की चाय नाश्ते से लेकर दोपहर के दाल भात और रात में रोटी सब्जी तक का इंतजाम इस सेवाश्रम में होता था। मरीजों को एम्स जैसे अस्पताल में भर्ती कराने के लिए पप्पू यादव और रंजीत रंजन ने कई विशेष लोगों को बहाल कर रखा था जो सुबह सुबह मरीजों के परिजनों के साथ जाकर एडमिट कराने के उपायों में लग जाते थें. पप्पू यादव और रंजीत रंजन के इस सेवाश्रम से बिहार के हजारां मरीजों को बड़ी राहत होती थी।

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पप्पू यादव और रंजीत रंजन के लोकसभा चुनाव हारने के बाद उन्हें अपना सरकारी आवास खाली करना पड़ा और इसी के साथ ही यह सेवाश्रम उन्हें खाली करना पड़ गया। अब जबकि एक बार फिर रंजीत रंजन को कांग्रेस ने राज्यसभा में भेज दिया है तो संभव है कि एक बार फिर से उनके सरकारी आवास में सेवाश्रम शुरु होगा और फिर से लोगों को राहत मिलनी शुरु हो जाएगी।

पर सवाल है बिहार के लोगों से कि आप जिन्हें वोट देते हो, क्या वो आपके लिए कभी ऐसे सेवाश्रम चला सकते हैं ? क्या तेजस्वी यादव, सुशील कुमार मोदी और नीतीश कुमार से ऐसे सेवाश्रम की उम्मीद आप कर सकते हैं ? जाति और धर्म की राजनीति में पप्पू यादव जैसे लोग भले ही पिछड़ जाते हो लेकिन अंततः हार आम जनता की हो जाती है।

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राजधानी दिल्ली तो दूर है पटना के ही पीएमसीएच और इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान जैसे अस्पतालों के बाहर जाकर देख सकते हैं कि कैसे मरीजों के परिजन प्लास्टिक और पेपर बिछाकर ही अस्पताल के बाहर सोने को मजबूर हैं। कहीं किसी विधायक, मंत्री के सरकारी आवास में किसी के सोने, ठहरने की व्यवस्था नहीं है और कोई व्यवस्था करे भी तो क्यों ? सेवा करने वालों का हाल पप्पू यादव जैसा होगा तो कोई भी नेता भूल कर भी ऐसे काम नहीं करेगा। कभी कभी लगता है कि बिहार के लोग अपनी दुर्गति के लिए स्वयं जिम्मेवार हैं।

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