बीजेपी, आरजेडी और जदयू का प्रशांत किशोर ने किया पर्दाफ़ाश….

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर इन दिनों अपने जन सुराज यात्रा को लेकर सुर्खियों में हैं, उनके इस यात्रा का हर तरफ चर्चाएं हो रही है. इससे पहले तकरीबन एक दशक तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार, कैप्टन अमरिंदर सिंह, केसीआर और ममता बनर्जी जैसे नेताओं के लिए चुनावी रणनीति बनाने वाले प्रशांत किशोर इन दिनों खुद ही अपने यात्रा पर निकले हैं………..

आपको बता दें कि गांधी जयंती यानि की 2 अक्टूबर के बाद से ही वह बिहार में अपना जन सुराज यात्रा निकाले हैं. इसके तहत वह लगभग 3,000 किलोमीटर की पद यात्रा पर हैं. इस दौरान वह लोगों से सीधा संवाद कर रहे हैं, उनके मुद्दों को तथा उनकी सरकार से क्या उम्मीदें है इसके बारे में भी जान रहे हैं और इसके साथ ही जनसरोकार की बात कर रहे हैं….

एक तरफ जहां वह जनता को जागरूक करते दिखाई दे रहे हैं तो वहीं परिवारवाद, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर तीखे हमले भी लगातार कर रहे हैं.. ऐसे में हर किसी की नज़रे उनपे बनी हुई है और लोगो के मन में ये सवाल भी है कि आखिर सबके लिए रणनीति बनाने वाले प्रशांत किशोर खुद किस रणनीति पर काम कर रहे हैं….

हालांकि खुद के रणनीति पर प्रशांत किशोर ने अब तक खुलकर किसी तरह का कुछ भी ऐलान नहीं किया है कि वह चुनावी राजनीति में उतरेंगे या फिर नहीं, परन्तु वही दुसरी ओर इसके संकेत जरूर दे रहे हैं. उन्होंने जिस तरह से तेजस्वी यादव की पढ़ाई से लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सुशासन तक के दावों पर सीधा हमला किये जा रहे है जिससे यही संकेत मिलता है कि वह किसी एक पार्टी पर नहीं बल्कि जेडीयू, आरजेडी और भाजपा तीनों पर ही अटैक कर रहे हैं……….

वे न केवल बेरोजगारी, विकास और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर ही बात कर रहे हैं. बल्कि धर्म, जाति के समीकरणों से परे बिहार और उसके विकास की भी बात कर रहे हैं. जिससे साफ है कि प्रशांत किशोर नए नैरेटिव के साथ आना चाहते हैं हालांकि उससे पहले फिलहाल वो जमीन टटोल रहे हैं. चुनावी रणनीति बनाते हुए भी प्रशांत किशोर का अलग ही अंदाज रहा है. वह अकसर विवादों से एक दम परे ऐसे मुद्दों पर फोकस करते रहे हैं, जो जनता से जुड़े हों. तथा खुद अपने लिए भी इसी रणनीति का इस्तेमाल करते दिखाई दे रहे है…..

वहीं बीच-बीच में परिवारवाद, भ्रष्टाचार और पिछड़ेपन के मुद्दों पर भी खुल कर बात कर रहे है वही सुपर-30 फिल्म का डायलॉग दोहराते हुए वह अकसर यह कहते हैं कि, अब राजा का बेटा राजा नहीं बनेगा और इसका साफ संकेत राजद पर ही रहता है. पिछले दिनों उन्होंने यहां तक कहा कि यदि लालू के बेटे न होते तो क्या 9वीं पास तेजस्वी यादव डिप्टी सीएम होते. इतनी पढ़ाई में इंसान चपरासी भी नहीं बन पाता…

पीके की जन सुराज यात्रा की शुरुआत हुए 11 दिन ही बीते हैं, लेकिन वह हर तरफ चर्चा का केंद्र बनने में जरूर सफल रहे हैं. एक तरफ मीडिया की सुर्खियों में हैं तो वहीं सीएम नीतीश कुमार से लेकर अन्य सभी दल उनके इस यात्रा को लेकर प्रतिक्रिया भी दे रहे है…..

दार्शनिक प्लेटो का जिक्र करते हुए वह कहते हैं, ‘यदि आप सरकार के कामकाज में दिलचस्पी नहीं लेते हैं तो फिर आप मूर्खों द्वारा शासित होने को तैयार रहें. वह वोटरों से अपील करते हैं कि आप मोदी, लालू और नीतीश के नाम पर वोट न करें बल्कि मुद्दों और उम्मीदवारो को देखकर ही मतदान करें…….

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