आज से गुप्त नवरात्रि की शुभारंभ हो चुकी है,जानिए पूजा की पूरी विधि और क्या है महत्व।

गुप्त नवरात्रि में देवी के दस रूपों की साधना की जाती है। जिनके नाम है, काली, तारा, छिन्नमस्ता,षोडशी, भुनेश्वरी,त्रिपुरभैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला इन दसों रूपों की पूजा गुप्त नवरात्रि के दौरान की जाती है। मान्यता है कि देवी के इन दस रूपों की साधना का काफी महत्व होता है।

हर वर्ष की तरह इस बार गुप्त नवरात्रि का आरंभ माघ के घनिष्ठा नक्षत्र में हुआ है। 2 फरवरी यानी कि आज से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है,जैसा कि हम सभी जानते हैं, चैत्र और आश्विन मास की नवरात्रि पूरे देश भर में श्रद्धापूर्वक से की जाती है। परंतु वही हर वर्ष में आने वाले दो गुप्त नवरात्रि को भी काफी महत्व दी जाती है।
गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से तंत्र-मंत्र की सिद्धि के लिए की जाती है.

हर युग में नवरात्रि का विशेष और अलग महत्व होता है। पुराण की मानें तो चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व सतयुग मे रहा है, और त्रेता युग में आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि का महत्व है तथा इसकी मान्यता भी अधिक है। परंतु वही द्वापर युग में माघ की गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व है तथा कलयुग में आश्विन मास की नवरात्रि की मान्यता रही है।
जैसा कि हम सभी जानते हैं,नवरात्रि के समय मां दुर्गा के भक्त मां को खुश करने के लिए तथा मनचाहा फल की कामना हेतु मां दुर्गा का पूजा-अर्चना पूरे विधि-विधान के साथ उपवास रखकर करते हैं। ऐसा करने से ना सिर्फ मां दुर्गा प्रसन्न होती है, साथ ही साथ अपने भक्तों की हर इच्छा को पूरी करती है।

नवरात्रि के 9 दिनों में देवी के अलग-अलग रूपों की पूजा अलग-अलग विधि विधानों के साथ की जाती है। देवी के 10 स्वरूपों की साधना का विशेष महत्व तांत्रिक क्रियाओं और तंत्र साधना के लिए भी काफी प्रभावशाली माना जाता हैं। इस वर्ष माघ गुप्त नवरात्रि का आरंभ धनिष्ठा नक्षत्र में हुआ है, जिससे यह संयोग है, कि गुप्त नवरात्रि पूरे 9 दिनों तक रहेगी और इस दौरान तांत्रिक शक्तियों पर प्रभाव रखने वाला राहु अपनी उच्च राशि वृष में स्थित है।
कहा जा रहा है,कि इस तरह का संयोग 19 वर्षों के बाद बना है। वही गुप्त नवरात्रि में सूर्य देव मकर राशि में अपने पुत्र शनि के साथ होंगे। जिसकी वजह से इस संयोग को साधना के लिए बेहद ही महत्वपूर्ण माना गया है।

गुप्त नवरात्रि पूजा की पूरी विधि:-
1.गुप्त नवरात्रि के दौरान तंत्र-मंत्र की पूजा करने वाले लोग आधी रात्रि में मां दुर्गा की पूजा अर्चना करते हैं।
2.गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की प्रतिमा को उच्च स्थान में स्थापित कर दिया जाता है तथा उसके पश्चात मां को लाल रंग की चुनरी चढ़ाया जाता है और लाल रंग का सिंदूर अर्पित किया जाता है।
3.मां दुर्गा के समक्ष नारियल तथा अन्य प्रकार की फल अर्पित किया जाता है और श्रृंगार की चीजें भी चढ़ाया जाता है।
4.ध्यान रहे कि मां दुर्गा की पूजा के दौरान लाल रंग का फूल अवश्य चढ़ाएं। लाल रंग को बेहद ही शुभ माना गया है।
मां की प्रतिमा के समक्ष दीपक जलाकर दुर्गा मां के मंत्रों का जाप करें और दुर्गा चालीसा का पाठ करें आरती अवश्य करें. 5.मां को लगाया हुआ भोग पूजा में सम्मिलित हुए लोगों में अवश्य वितरण करें।

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