मरने के बाद हो गया बंटवारा, बेटे को हेलीकॉप्टर, भाई को सिलाई मशीन

पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय रामविलास पासवान की मृत्यु के साल भर बाद ही उनकी राजनीतिक विरासत का बंटवारा हो गया. पशुपति कुमार पारस और चिराग पासवान के बीच हुई राजनीतिक जंग में अब लोजपा का मूल अस्तित्व समाप्त हो चुका है.

केंद्रीय चुनाव आयोग ने लोजपा के विभाजन को सहमति प्रदान करते हुए चिराग पासवान को हेलीकॉप्टर और पशुपति कुमार पारस को सिलाई मशीन चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया है. वहीं चुनाव आयोग के फैसले के बाद अब पार्टी का नाम भी बदल चुका है.

वहीं चुनाव आयोग के फैसले के अनुसार अब चिराग पासवान की पार्टी का नाम लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास होगा तो वहीं पशुपति कुमार पारस की पार्टी का नाम राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी होगा.

रामविलास पासवान ने कभी अपनी जिंदगी में कभी सोचा भी नहीं होगा कि उनकी बनाई हुई पार्टी में एक वक्त ऐसा भी आएगा जब उनके सगे भाई और बेटे के बीच इस कदर विरासत की जंग होगी. परिवार का झगड़ा सड़क पर आएगा और दुनिया मजा लूटेगी.

अब बंटवारा हो चुका है. एक छोटी सी पार्टी के दो हिस्से हो चुके हैं. बिहार की दो सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं. चिराग की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के उम्मीदवार दोनों सीटों पर अपना भाग्य आजमाएंगे जबकि पशुपति कुमार पारस की पार्टी राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी जेडीयू के उम्मीदवारों का समर्थन करेगी.

जाहिर तौर पर चिराग पासवान के नेतृत्व में लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के उम्मीदवार दोनों सीटों के उपचुनाव को दिलचस्प बनाएंगे. इस पार्टी का यह पहला चुनाव होगा. नतीजों और उम्मीदवारों को मिलने वाले वोटों पर भी सबकी नजर रहेगी.

बिहार की राजनीति पर निगाह रखने वाले कई विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी में टूट के बाद से चिराग पासवान मजबूत हुए हैं. लोजपा के वोटर्स चिराग के पक्ष में गोलबंद हुए हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि रामविलास पासवान की पार्टी को तोड़ने में जेडीयू का हाथ है और नीतीश कुमार इस खेल के मास्टरमांइड हैं.

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