पंजाब में उलझी कांग्रेस

पंजाब में उलझी कांग्रेस

कांग्रेस इस देश की सबसे पुरानी पार्टी है लेकिन दुर्भाग्य तो देखिए कांग्रेस का कि इसके बाद एक पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष तक नहीं है. लोकसभा चुनाव 2019 में पराजय के बाद तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. उसके बाद अंतरिम व्यवस्था के तहत सोनिया गांधी ही अध्यक्ष पद पर आसीन हैं लेकिन इस बीच पूरी कांग्रेस कलह में डूब चुकी है. 
केरल से लेकर कश्मीर तक और छत्तीसगढ़ से लेकर पंजाब तक कांग्रेस में सिर फुटौव्वल का दौर चल रहा है. सिर फुटौव्वल की वजह से ही कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में अपनी सरकार तक गंवा दी लेकिन कांग्रेस की कलह का कोई इलाज नजर नहीं आ रहा है.  
इन दिनों देश में कांग्रेस का सबसे मजबूत किला पंजाब माना जाता है. यहां पर सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धु के बीच घमासान मचा हुआ है. इसी तरह राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट के बीच महाभारत कई सालों से जारी है. अभी तक छत्तीसगढ़ शांत वातावरण में था तो वहां पर राज्य सरकार के मंत्री टीएस सिंहदेव ने मोरचा खोल दिया. 
यूपी, बंगाल, बिहार, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में कांग्रेस नहीं के बराबर हो चुकी है. मजेदार बात तो यह है कि तमाम दुर्गति के बावजूद कांग्रेस इन राज्यों में अपनी वापसी की कोशिशें करती हुई दिखाई भी नहीं देती. कांग्रेस के साथ आज किसी भी समुदाय का एक फिक्स वोट बैंक नहीं है और नहीं किसी प्रकार का कोई कैडर. 
जहां पूरे देश में इन दिनों पिछड़े वर्गों की राजनीति हो रही है. पीएम मोदी तक खुद को मंचों से अति पिछड़ा का बेटा बताते नहीं थकते.. वहीं कांग्रेस आज भी ब्राह्मणों और ठाकुरों से बाहर निकलती हुई नजर नहीं आती. जातीय जनगणना के मुद्दे पर लगभग सभी दल हाथ में हथियार लिए हुए नजर आ रहे हैं लेकिन कांग्रेस जैसी मुंह वैसी बात कर रही है ताकी सवर्ण नाराज न हो जाए… वह सवर्ण जो कांग्रेस को वोट देना तो दूर… देशद्रोही पार्टी बताते हैं. 
एक सशक्त देश के लिए सशक्त सरकार के साथ सशक्त विपक्ष का होना बेहद आवश्यक है. ऐसा नहीं है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी मोदी सरकार के खिलाफ आवाज नहीं उठाते या फिर सरकार के खिलाफ मुखर नहीं हैं. राहुल गांधी संसद से लेकर सड़क तक सरकार के खिलाफ अंादोलनरत रहते हैं लेकिन जमीन पर कांग्रेस कहीं हैं हीं नहंीं. राहुल का विरोध सिर्फ मीडिया तक रह जाता है, वह गांवों और गलियों की सियासी गपशप से दूर रहता है. 
कई लोगों का मानना है कि भारत में संवैधानिक संस्थाओं को कुचला जा रहा है, केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग हो रहा है, सरकारी संस्थाओं को बेचा जा रहा है और किसी को कोई रोकने वाला नहीं है. इसकी वजह यह है कि आज देश में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस बेहद खस्ता हालत में पहुंच चुका है. कईयों का मानना है कि कांग्रेस की राजनीति को कैंसर हो चुका है. अब इसे कौन कीमो देकर स्वस्थ करता है, ये भविष्य ही बताएगा.

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