कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से बढ़ी बीजेपी की मुश्किलें…….

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से बढ़ सकती है बीजेपी की मुश्किलें या फिर भारी पड़ सकते हैं मोदी और शाह. तो चलिए एक नजर डालते हैं कि मलिकार्जुन खडगे की जीत के बाद आखिर किस प्रकार बढ़ सकती है बीजेपी की परेशानियां. कांग्रेस को मल्लिकार्जुन खड़गे के रूप में करीब 24 वषों के बाद गैर-गांधी अध्यक्ष मिला है…..

वह 26 अक्टूबर को कार्यभार संभालेंगे हालांकि, उनके सामने 2022, 2023 विधानसभा चुनाव के अलावा 2024 लोकसभा चुनाव और पार्टी में जारी दल-बदल जैसी परेशानियां भी हैं. इसके बाद भी सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या वह भारतीय जनता पार्टी का सामना करने के लिए कांग्रेस को तैयार कर पाएंगे…..

तो वहीं दूसरी तरफ उनकी जीत से ही दिल्ली के अलावा कर्नाटक में भी राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावनाएं जताई जा रही हैं. दरअसल, खुद खड़गे ने भी कलबुर्गी से ही राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी. ऐसे में राज्य के बड़े नेता के पार्टी प्रमुख बनने से प्रदेश इकाई और जातीय समीकरण पर असर पड़ सकता है. इसकी आंच भारतीय जनता पार्टी पर भी पड़ सकती है….

वहीं सूत्रों अनुसार 80 वर्षीय नेता की एंट्री अनुसूचित जाति यानी SC की भाजपा की ओर बढ़ती रफ्तार को धीमी कर सकती है. दरअसल, खड़गे खुद SC से आते हैं, जहां भाजपा ने सियासी जमीन तलाश ली है. अब कांग्रेस नेता के प्रमोशन से इनमें से कुछ वर्ग भी खड़गे के पीछे हो सकते हैं. इसके अलावा कांग्रेस भी यह संदेश देना चाहेगी कि उनका नेतृत्व दलित नेता कर रहे हैं और कांग्रेस शासन में उनका ध्यान रखा जाएगा…

अब कर्नाटक में कांग्रेस को क्या और किस प्रकार होगा फायदा….
पहला, प्रदेश प्रमुख डीके शिवकुमार और पूर्व सीएम के बीच जारी तनातनी पर विराम लग सकता है. विधानसभा चुनाव 2023 में कांग्रेस की सरकार बनने की स्थिति में सीएम उम्मीदवार चुनने में फायदा हो सकता है. हालांकि, खुद खड़गे पहले तीन बार सीएम बनने से चूक गए थे. इसके अलावा कर्नाटक में बड़े कद के नेता की मौजूदगी पार्टी को टिकट बटवारे में मदद कर सकती है….

जानकारों का कहना है कि भाजपा का सामना करने के लिए खड़गे को कई चुनौतियों से पार पाना होगा. इसके लिए उन्हें यह साबित करना होगा कि वह गांधी परिवार के प्रॉक्सी नहीं हैं और दल पर उनका नियंत्रण है. हालांकि, उन्होंने एक साक्षात्कार के दौरान कहा था कि वह शायद हर फैसले में नेहरू-गांधी परिवार से विचार विमर्श न करें, लेकिन अनुभव को देखते हुए वह गांधी परिवार का मार्गदर्शन और सलाह लेंगे……..

मतगणना शुरू होते ही शशि थरूर ने लगाया फर्जीवाड़े का आरोप…

Leave a Reply