आरसीपी और ललन की लड़ाई में किसी एक को पार्टी से बाहर जाना पड़ेगा !

केंद्रीय मंत्री और पार्टी में नंबर दो माने जाने वाले आरसीपी सिंह ने पिछले दिनों कह दिया कि सीएम नीतीश कुमार के जन्मदिन पर पार्टी का सदस्यता अभियान शुरु होगा. आरसीपी सिंह की इस घोषणा पर राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने रायता फैला दिया. ललन सिंह ने कहा कि ऐसे कैसे सदस्यता अभियान चल सकता है ! पार्टी सिस्टम से चलता है. हमारे नेता नीतीश कुमार जन्मदिन नहीं मनाते.

ललन सिंह यहीं नहीं रुकें, आरसीपी सिंह की फजीहत करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी का सदस्यता अभियान छिटपुट तरीके से नहीं चलता है. अभी सदस्यता बही छपा कहां हैं ? छपेगा तो मेरे हस्ताक्षर से ही छपेगा न…. एक तरह से ललन सिंह ने आरसीपी सिंह को उनके पॉवर और हैसियत दोनों का एहसास करा दिया.

अपने इस बयान से ललन सिंह ने स्पष्ट कर दिया कि पार्टी का कोई भी कार्यक्रम तभी चलेगा, जब और जैसी उनकी मर्जी होगी. ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि ललन और आरसीपी एक दूसरे से टकराए हो… इसके पहले यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने के मुद्दे पर भी ललन सिंह ने आरसीपी सिंह को खूब खरी खोटी सुनाई थी.

ललन सिंह ने स्पष्ट तरीके से कहा था कि आरसीपी सिंह ने पार्टी को अंधेरे में रखा. यूपी में भाजपा जेडीयू के गठबंधन को लेकर आरसीपी सिंह ने जिम्मेवारी अपने उपर ली थी और अंत में नतीजा यह हुआ कि गठबंधन नहीं हुआ. इसका असर पार्टी की तैयारियों पर पड़ गया. अगर सारी चीजें समय पर साफ हो जाती तो हम 100 सीटों पर चुनाव लड़ते. ललन सिंह ने कहा था कि बीजेपी से बात करने के लिए एकमात्र अधिकृत व्यक्ति आरसीपी सिंह ही थें.

इधर खबरों से अलग राजनीतिक गलियारों की बात करें तो यह चर्चा आम हो चुकी है कि अब आरसीपी सिंह का सीएम नीतीश कुमार के साथ मन भर गया है. आरसीपी सिंह को इन दिनों भाजपा, आरएसएस, नरेंद्र मोदी और अमित शाह अच्छे लगने लगे हैं. इतना ही नहीं आरसीपी सिंह ने अपनी कलाकारी से पीएम मोदी को सम्मोहित कर लिया है और इन दिनों वह प्रधानमंत्री के पसंदीदा मंत्रियों में से एक हो चुके हैं.

ललन सिंह ने तो पिछले दिनों यहां तक कहा कि किसी भी व्यक्ति के कुछ भी बोलने की कोई अहमियत नहीं है. अगर अहमियत है तो सिर्फ नीतीश कुमार के बात की. बाकी कोई कुछ भी बोलता रहे, फर्क नहीं पड़ता है.

नीतीश कुमार इस पूर प्रकरण पर खामोश हैं. कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार भी आरसीपी सिंह के रवैये से खुश नहीं हैं. ललन सिंह बिना नीतीश कुमार की शह या संरक्षण के कुछ नहीं बोल सकते हैं. शायद नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह की राहें जल्द ही जुदा हो सकती है. तब तक इस सियासी महाभारत का लिजिए आनंद और पर्दा गिरने का किजिए इंतजार….

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