यूपी में तेजी से प्रियंका के पक्ष में बनता माहौल, भाजपा से ज्यादा सपा को घाटा

लखीमपुर खीरी विवाद में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी जिस तरह से एक्टिव हुई, उसने यूपी की सियासी फिजा में गर्माहट घोल दी है. कई सालों से यूपी में अपना अस्तित्व तलाश रही कांग्रेस का ग्राफ इस फैसले के बाद तेजी से बढ़ा है. जिस प्रकार का माहौल यूपी में बना है, उसमें ऐसा लगने लगा है कि कांग्रेस अब तेजी से यूपी की राजनीति को त्रिकोणिय संघर्ष की ओर ले जा रही है. कुछ दिनों पहले तक लड़ाई भाजपा बनाम सपा की हो रही थी लेकिन अब इस खेल में कांग्रेस समाजवादी पार्टी के स्पेस को ले रही है. इससे बीजेपी को तो ज्यादा नुकसान नजर नहीं आ रहा पर समाजवादी पार्टी को परेशानी जरुर होगी.

ऐसा नहीं है कि प्रियंका ने लखीमपुर खीरी के बवाल के बाद से ही अपनी सक्रियता दिखाई दी है बल्कि पिछले दो तीन सालों में कांग्रेस ने यूपी में अपना संगठन निचले स्तर तक खड़ा कर लिया है. ये प्रियंका की मेहनत का नतीजा है कि हर गांव में कांग्रेस का कैडर दिखाई देने लगा है जो मुखर होकर कांग्रेस के बारे में बात करता है.

अब जबकि लखीमपुर खीरी विवाद में प्रियंका गांधी को रौद्र रुप देखने को मिला, उससे पूरी योगी सरकार को बैकफुट पर आने को मजबूर होना पड़ा. ब्राह्मणों और दलितों में कांग्रेस एक बार फिर से चर्चा के केंद्र में है. यूपी की राजनीति में ऐसा बदलाव पिछले दो चार दिनों में आया है कि समाजवादी पार्टी की बजाय अब विपक्षी राजनीति की धुरी कांग्रेस बनती हुई दिखाई दे रही है.

जिसे भाजपा को वोट देना है, वह देगा लेकिन जो भाजपा विरोधी वोटर हैं, उनमें प्रियंका की सक्रियता की तारीफ हो रही है. उधर इमरान प्रतापगढ़ी जैसे चेहरे एक बार फिर से मुसलमानों के बीच कांग्रेस को जीवंत करने की कोशिशों में कामयाब होते हुए दिखाई दे रहे हैं. यूपी के लोग अब कांग्रेस की चर्चा करने लगे हैं. कांग्रेस ने कई सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा भी कर दी है. ऐसे में कांग्रेस यूपी में भले ही अपनी सरकार न बना पाए लेकिन उनके विधायकों और वोट प्रतिशत का बढ़ना अब लगभग तय माना जा रहा है.

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