जानिए क्या है धनतेरस मनाने की खास वजह।

कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। धनतेरस सनातन धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है।धनतेरस भारत के अलग-अलग भागों में विभिन्न प्रकार से मनाया जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि धनतेरस के दिन ही समुंद्र मंथन हुई थी। देवताओं और दानवों के बीच हो रही समुद्र मंथन में भगवान धन्वंतरि हाथों में अमृत से भरा हुआ कलश लेकर प्रकट हुए थे‌।

कहां जाता है भगवान धन्वंतरी स्वयं साक्षात नारायण के अंश स्वरूप थे। भगवान विष्णु ही धन्वंतरी देवता के रूप में प्रकट हुए थे जिसका भागवत पुराण में विस्तार से इसका उल्लेख किया गया है।  भगवान धन्वंतरी को आयुर्वेद के जनक भी कहते हैं। उन्होंने अपने अमृत कलश से देवताओं को अमृत का पान करवाया था जिससे सारे देवता अमर हो गए थे।

धनतेरस पर्व को मनाने का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद के सिद्धांत को अच्छी तरीके से समझना, अपने जीवन में पालन करना और स्वस्थ रहना है। इसीलिए आयु और स्वस्थता की कामना हेतु लोग धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि का पूजन भी करते हैं। 2016 में भारत सरकार ने धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था। धन शब्द का अभिप्राय आयुर्वेद में स्वास्थ्य से किया गया है। इसका अर्थ यह है कि स्वास्थ्य धन की वृद्धि करना चाहिए ना कि आर्थिक धन की।

हालांकि लोकमान्यताओं के अनुसार यह भी कहा जाता है, कि इस दिन धन खरीदने से धन में वृद्धि दोगुनी होती है। धनतेरस के पावन अवसर पर लोग बर्तन खरीदते हैं तथा धन की वृद्धि के लिए सोने-चांदी के आभूषण तथा चांदी, तांबे और पीतल के गृह उपयोगी बर्तन भी खरीदते हैं। ताकि उनका धन बढ़े और पहले से अधिक वृद्धि भी हो। इस दिन लोग पुराने बर्तनों को बदलकर नए- नए बर्तन खरीदते हैं।

हालांकि आज के समय में धनतेरस के दिन लोग बर्तन और आभूषण तो खरीदते ही हैं। साथ ही साथ इसके अलावा वाहन,कंप्यूटर, टीवी मोबाइल आदि भी खरीद रहे हैं। कई लोग धनतेरस के मौके पर सोने या चांदी के सिक्के खरीदते हैं क्योंकि धनतेरस के दिन इन्हें खरीदना काफी शुभ माना गया है। हर वर्ष की तरह इस बार भी धनतेरस कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को ही मनाया जाएगा तथा इस बार धनतेरस दो नवंबर दिन मंगलवार को पड़ रहा है

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