सिरसा ने गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से इस्तीफा देकर BJP ज्वाइन क्यों किया ?

लोगों को उस वक्त बड़ी हैरानी हुई जब दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान और अकाली नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने गुरुद्वारा कमेटी से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी का पट्टा गले में पहन लिया.

दरअसल पिछले दिनों हुए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनावों में मनजिंदर सिंह सिरसा लगभग 600 वोटों के अंतर से चुनाव हार गए थें. इसके बाद भी वो लगातार पिछले दरवाजे यानी कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के कोटे से नॉमिनेट होकर मेंबर बनने की जुगाड़ में थें लेकिन विपक्षी खेमा उनकी राह में लगातार रोड़े अटका रहा था.

जब एसजीपीसी ने अपने कोटे से सिरसा को मेंबर बनाने की पहल की तो परमजीत सिंह सरना और हरविंदर सिंह सरना के साथ ही पूर्व प्रधान मनजीत सिंह जीके का ग्रुप कोर्ट की शरण में चला गया.

कोर्ट ने सिरसा से पंजाबी लिखने और पढ़ने को कहा तो सिरसा फेल हो गए. सिरसा अंत तक कोशिश करते रहें कि वो किसी तरह से प्रबंधक कमेटी के मेंबर बन जाएं ताकी फिर से प्रधान बनने का रास्ता साफ हो जाए लेकिन विपक्षी खेमे ने इतनी ज्यादा कोर्ट कचहरी कर दी थी कि मामला बनता नजर ही नहीं आ रहा था.

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का विपक्षी खेमा हर दिन नए नए मामले लेकर कोर्ट पहुंच रहा था. उधर दिल्ली सरकार इस प्रयास में थी कि किसी भी तरह से गुरुद्वारा में भ्रष्टाचार का मामला साबित हो जाए तो गुरुद्वारा कमेटी को भंग कर वहां सरकारी रिसीवर बहाल कर दिया जाए.


03 महीने पहले ही गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का चुनाव हो गया था लेकिन सिरसा की प्रधान बनने की जिद की वजह से अभी तक कमेटी बन नहीं पाई थी. आपस में जिस तरह से गुटबाजी चरम पर थी, ऐसा तय हो गया था कि अब गुरुद्वारा सरकार और प्रशासन मिल कर चलाएगी जिस पर नियंत्रण कोर्ट का होगा लेकिन सिरसा ने इस्तीफा देकर यह सब होने से रोक लिया.

सिरसा ने यह भी कहा कि मुझे संगत ने बहुत मान सम्मान बख्शा है. अब मैं आज के बाद कभी भी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का कोई चुनाव नहीं लडूंगा.

भ्रष्टाचार के लगातार उजागर होते मामलों में सिरसा के गले की फांस बढ़ती ही जा रही थी. श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने इस मामले पर बोलते हुए कहा कि गुरुद्वारा में भ्रष्टाचार के मामले में जेल का डर दिखाकर मनजिंदर सिंह सिरसा को बीजेपी में शामिल करा लिया गया है. जत्थेदार ने साफ तौर पर कहा कि सिरसा का बीजेपी में जाना गलत है लेकिन इस फैसले के लिए उन्हें मजबूर किया गया. लगातार गुरुद्वारे के मामले को कोर्ट में ले जाया गया. मजबूर होकर सिरसा बीजेपी में चले गए.

उधर दिल्ली के सिख संगठनों ने प्रधान मनिंजंदर सिंह सिरसा, महासचिव हरमीत सिंह कालका समेत प्रबंधक कमेटी के 11 सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया था. बताया जा रहा है कि इस मामले में सभी पर बड़े एक्शन की तैयारी थी. सिरसा के सामने इस्तीफा देने के अलावा कोई इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था.

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी करोड़ो रुपये के देनदारी के चक्कर में फंसी हुई है. दिल्ली में गुरुद्वारा कमेटी के कई शैक्षणिक संस्थान चल रहे हैं. इनमें 14 हजार से ज्यादा बच्चे पढ़ रहे हैं. दिल्ली हाईकोर्ट में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से संबंधित 100 से ज्यादा मामले चल रहे हैं. कई मामलों में कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया है. आशंका जताई जा रही है कि कहीं गुरुद्वारों से संबंधित मामलों को कहीं कोर्ट सरकार को न सौंप दे !

 

वहीं एसजीपीसी के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि सिरसा का यह कदम गलत है. भाजपा ने एक साल तक किसानों को सड़कों पर बैठाया. 700 लोगों की मौत हो गई. ऐसी पार्टी में शामिल होना सिख भावनाओं के साथ खिलवाड़ है. सिरसा भूल सुधार करें और वापस अकाली दल में आ जाएं. शिरोमणि अकाली दल ने कहा है कि भाजपा के साथ जाकर सिरसा ने खालसा पंथ से गद्दारी की है. ऐसी ही तरकीब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी करती थीं. जो भी सिख नेता कौम के लिए काम करता था, वह उसे कांग्रेस में शामिल कर लेती थीं.

वहीं अकाल तख्त इस बात पर भी काफी दुखी है कि आए दिन गुरुद्वारों के मामले कोर्ट में जा रहे हैं. पंथक स्तर पर गुरुद्वारों के विवाद नहीं सुलझ पा रहे हैं. जो कमेटी में है, वो कमेटी छोड़ना नहीं चाहता और जो कमेटी में नहीं हैं, वो गुरुद्वारे के मामले को कोर्ट ले जा रहे हैं और कोर्ट गुरुद्वारे को प्रशासन के जिम्मे सौंप दे रहा है.

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